उत्तरप्रदेशक्राइम

भाजपा नेता का 500-500 सौ नोटों के साथ वीडियो वायरल

राजेश गौतम

भारत रक्षक न्यूज

महराजगंज राजनीति में भूचाल आ गया है। क्योंकि सोशल मीडिया पर 500-500 सौ के नोटों के गड्डियों से भरा एक वीडियो वायरल को लेकर

एक कमरे के भीतर रेड कारपेट पर नोटों के बण्डल सजे हैं और उन्हीं के बीच भाजपा के जिला मंत्री गौतम तिवारी मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर नोटों को देखते नजर आते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ सुनाई देता है लाइट बुझा दीजिए। कुछ सेकेंड बाद दूसरी आवाज आती है।

मंत्री जी, वीडियो बन गया है। यह वीडियो करीब 20 सेकेंड का बताया जा रहा है। लेकिन इसके सामने आते ही जिला महराजगंज की राजनीति में भूकंप आ गया है।

वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा जिला मंत्री गौतम तिवारी ने कुछ पत्रकारों को बुलाकर सफाई दी। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिखाया गया पैसा असली नहीं, कागज का नकली पैसा है। कुछ तंत्र-मंत्र करने वालों ने उन्हें झांसे में लिया। जमीन दिलाने के नाम पर उनसे करीब डेढ करोड रुपये ठग

लिए गए।यह वीडियो बनारस से जुड़े लोगों द्वारा बनाया गया। हवाला या भ्रष्टाचार से उनका कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा नेता का कहना है यह पैसा मेरा नहीं है। मैं एफआईआर के लिए आवेदन दे चुका हूं। पुलिस जांच करेगी। लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में एफआईआर नदारद है।

मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब कोतवाली प्रभारी निरीक्षक निर्भय सिंह ने साफ कहा इस संबंध में अभी तक कोई प्रार्थना पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। अगर मिलेगा तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। यानि एफआईआर का दावा और पुलिस का बयान दोनों में साफ विरोधाभास सामने आ गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर लोग इसे हवाला कारोबार, काले धन, राजनीतिक संरक्षण, सत्ता की चमक. दमक से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि भाजपा नेता इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। अब अनसुलझ यह है कि वीडियो कब और कहां का है। नोट असली है या नकली, इसकी जांच कब होगी।

क्या सत्ता पक्ष होने के नाते इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया जायेगा? अगर पैसा नकली था तो इतने बड़े पैमाने पर वीडियो क्यों बना। नकली नोट रखना भी गुनाह है। इस पर भी कार्यवाही हो सकती है। अगर तहरीर दी गई है तो थाने के रिकॉर्ड में क्यों नहीं है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सत्ता, पैसा और साजिश के बीच सच्चाई आखिर कहां छिपी है। जांच के बाद ही साफ होगा कि यह मामला ठगी का है या सियासी रकम है जो सफेद करने के लिये रखा गया था।

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